Monday, October 5, 2015

भृगुसंहिता मे कुंडली शोधन


भृगुसंहिता ग्रन्थ के रचिता भृगु ऋषिः है।
यह अमूल्य ग्रन्थ से मनुष्य के समग्र जीवनवृतान्त जान सकते है।
ग्रन्थ में भृगुऋषि लिखते है की भृगुसंहिता श्रध्दावान लोको  के लिए है|

   "श्रध्धावन्ता जनहंतुस्यात भद्ग्रन्थम अमृततुल्यकम ।
    विना  श्रध्धा  न फलीभूत वज वाकय इदम॥ "

किन्तु जन्मसमय निश्चित होना चाहिए जिससे जन्म की इष्ट घटि निश्चित कर ले. ।
भृगुऋषि के मत अनुसार इष्ट शुध्धि के बिना फलादेश का निर्णय शक्य नहीं है।

     "इष्ट शुध्धि वीना शुक्र फलादेशो न विध्यते ।
        इष्ट शुद्धिस्तु सर्वेषाम फलादेशस्य व्याख्यया ॥"

भृगुसंहिता के कुंडली विभाग में से जातक की कुंडली की समान  कुंडली  शोध लेनी चाहिये। 
सर्व प्रथम शनि  बाद में गुरु,मंगल ,शुक्र,बुध,सूर्य  राशि में स्थित  समान कुंडली शोध  लिजिए।   
 तत  पश्चयात फलविभाग में उस अंक की कुंडली का फल विचार देखना चाहिए ।